एक टाइगर की मौत

भोपाल। एक टाइगर की मौत से केवल हमारा इको सिस्टम ही प्रभावित नहीं होता, बल्कि इसके चलते हमारी पूरी लाइफ प्रभावित होती है। मंगलवार को टाइगर-डे के अवसर पर लेकव्यू और डीबी मॉल में हुए नुक्कड़ नाटक के जरिए कलाकारों ने यही मैसेज देने का प्रयास किया।



ऐसी होगी बिना टाइगर के लाइफ

इसके तहत आईआईएफएम एवं मप्र टाइगर फाउंडेशन सोसायटी की ओर से पेश इस नाटक में बताया गया कि एक टाइगर की मौत के क्या मायने होते हैं। एक टाइगर के मरने से केवल जंगल सूना नहीं होता, बल्कि कहीं कहीं हमारी लाइफ भी प्रभावित होती है। नाटक में बताया कि हमारे इको सिस्टम में टाइगर बहुत महत्वपूर्ण हैं। और उनकी दिन दिन घटती संख्या हमारे लिए खतरे का संकेत है। अगर हमने इस स्थिति को नहीं रोका, तो कल हमारी लाइफ खतरे में जाएगी। यही वजह है कि टाइगर को राष्ट्रीय धरोहर माना जाता है। नाटक के माध्यम से बताया गया कि इको लाइफ सर्किल में कोई भी गायब होगा तो उससे पूरा नेचर और हमारी लाइफ पर भी असर पड़ता है। नाटक में आईआईएफएम के वरुण और उनकी टीम के सदस्य टाइगर, गिद्ध, दूसरे जानवरों और फॉरेस्ट गार्ड की भूमिका में थे।

Source: Peoples Samachar (Dated 30 Jul 2014)



Source: Patrika Newspaper (Dated 30 Jul 2014)